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On the Nature of Love



On the Nature of Love :I see that instant I fall in love with by Rabinder Nath Tagore, Translated from Bengali by Ketaki Kushari Dyson From Chaitali ( १८९६)
The night is black and the forest has no end;
a million people thread it in a million ways.
We have trysts to keep in the darkness,
but where or with whom- of that we are unaware.
But we have this faith- that a lifetime's blisswill
appear any minute, with a smile upon its lips.
Scents, touches, sounds, snatches of songs brush us,
pass us, give us delightful shocks.
Then peradventure there's a flash of lightning:
whomever I see that instant I fall in love with.
I call that person and cry:
'This life is blest! For your sake such miles have I traversed!'
All those others who come close and
moved off in the darkness - I dont know if they exist or not.

From Chaitali (1896), the Web:http://www.4to40.com/poems/index.asp?id=221

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भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

दिल दे तो इस मिज़ाज़ का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी खुशी से गुजार दे

सजाकर मैयते उम्मीद नाकामी के फूलों से
किसी बेदर्द ने रख दी मेरे टूटे हुए दिल में

छेड़ ना ऐ फरिश्ते तू जिक्रे गमें जानांना
क्यूँ याद दिलाते हो भूला हुआ अफ़साना
यह न थी हमारी किस्मत जो विसाले यार होताअगर और जीते रहते यही इन्तेज़ार होता तेरे वादे पर जिऐं हम तो यह जान छूट जानाकि खुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होतातेरी नाज़ुकी से जाना कि बंधा था अहदे फ़र्दाकभी तू न तोड़ सकता अगर इस्तेवार होटायह कहाँ की दोस्ती है (कि) बने हैं दोस्त नासेहकोई चारासाज़ होता कोई ग़म गुसार होताकहूं किससे मैं के क्या है शबे ग़म बुरी बला हैमुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता(ग़ालिब)इशरते कत्ल गहे अहले तमन्ना मत पूछइदे-नज्जारा है शमशीर की उरियाँ होनाकी तेरे क़त्ल के बाद उसने ज़फा होनाकि उस ज़ुद पशेमाँ का पशेमां होनाfor more details go to:http://bhagatsinghstudy.blogspot.com/

चुनिंदा शायरी -कंचन

तू रख होंसला वो मंजर भी आएगा।
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा।
थक हार कर न रुकना ऐ मंजिल के मुसाफ़िर,
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा।


जिंदगी की असली उडान अभी बाकी है।
जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है।
अभी तो नापी है मुट्ठी भर  ज़मीन हमने ,
अभी तो सारा आसमान बाकी है।

आंधियों  में भी जैसे कुछ  चिराग़  जला करते हैं।
उतनी ही हिम्मत ऐ होंसला हम भी रखा करते हैं।
मंजिलों , अभी और दूर है हमारी मंजिल ,
चाँद सितारें  तो राहों में मिला करते हैं।

संग्रहकर्ता :
कंचन
बी ए 3.

अज आखां वारिस शाह नू - अमृता प्रीतम

अज आखां वारिस शाह नू कितों कबरां विचो बोल !
ते अज किताब -ऐ -इश्क दा कोई अगला वर्का फोल !

इक रोई सी धी पंजाब दी तू लिख -लिख मारे वेन
अज लखा धीयाँ रोंदिया तैनू वारिस शाह नू कहन

उठ दर्मंदिया दिया दर्दीआ उठ तक अपना पंजाब !
अज बेले लास्सन विछियां ते लहू दी भरी चेनाब !

किसे ने पंजा पानीय विच दीत्ती ज़हिर रला !
ते उन्ह्ना पनिया ने धरत उन दित्ता पानी ला !


जित्थे वजदी फूक प्यार दी वे ओह वन्झ्ली गई गाछ
रांझे दे सब वीर अज भूल गए उसदी जाच

धरती ते लहू वसिया , क़ब्रण पयियाँ चोण
प्रीत दियां शाहज़ादीआन् अज विच म्जारान्न रोण

अज सब ‘कैदों ’ बन गए , हुस्न इश्क दे चोर
अज किथों ल्यायिये लब्भ के वारिस शाह इक होर

aaj आखां वारिस शाह नून कित्तों कबरां विचो बोल !
ते अज किताब -ऐ -इश्क दा कोई अगला वर्का फोल !

Cited From:http://www.folkpunjab.com/amrita-pritam/aj-akhan-waris-shah-noon/
Date:11-4-2008