"नियामक" शब्द रुडयार्ड किपलिंग की कविता "If" के हिन्दी अनुवाद मे मुझे मिला था। यह कविता मुझे काफी अच्छी और प्रेरणा स्त्रोत लगी। तब से यह शब्द मेरी जिन्दगी का अहम् और चुनिन्दा शब्द बन गया है। मूल कविता यहाँ पर दी गई है उम्मीद है आपको भी पसंद आएगी, इस सेक्शन मे आप चुनिंदा कवियों ,लेखकों ,विचारको के विचार इस मुख पृष्ट पर पाएंगे। -देशराज सिरसवाल

Tuesday, April 15, 2008

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी / इक़बाल

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी

जिन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की जीन्नत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

jindagii हो मेरी परवाने की सुरत या रब
इलाम की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़ैइफ़ों से मोहब्बत करना

mere अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको॥

Cited From:

1 comments:

Guhn said...

See Please Here