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लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी / इक़बाल

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
जिन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम अँधेरा हो जाए
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की जीन्नत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

jindagii हो मेरी परवाने की सुरत या रब
इलाम की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मंदों से ज़ैइफ़ों से मोहब्बत करना

mere अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको॥

Cited From:

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चुनिंदा शायरी -कंचन

तू रख होंसला वो मंजर भी आएगा।
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा।
थक हार कर न रुकना ऐ मंजिल के मुसाफ़िर,
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा।


जिंदगी की असली उडान अभी बाकी है।
जिंदगी के कई इम्तिहान अभी बाकी है।
अभी तो नापी है मुट्ठी भर  ज़मीन हमने ,
अभी तो सारा आसमान बाकी है।

आंधियों  में भी जैसे कुछ  चिराग़  जला करते हैं।
उतनी ही हिम्मत ऐ होंसला हम भी रखा करते हैं।
मंजिलों , अभी और दूर है हमारी मंजिल ,
चाँद सितारें  तो राहों में मिला करते हैं।

संग्रहकर्ता :
कंचन
बी ए 3.

भगत सिंह की पसंदीदा शायरी

दिल दे तो इस मिज़ाज़ का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी खुशी से गुजार दे

सजाकर मैयते उम्मीद नाकामी के फूलों से
किसी बेदर्द ने रख दी मेरे टूटे हुए दिल में

छेड़ ना ऐ फरिश्ते तू जिक्रे गमें जानांना
क्यूँ याद दिलाते हो भूला हुआ अफ़साना
यह न थी हमारी किस्मत जो विसाले यार होताअगर और जीते रहते यही इन्तेज़ार होता तेरे वादे पर जिऐं हम तो यह जान छूट जानाकि खुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होतातेरी नाज़ुकी से जाना कि बंधा था अहदे फ़र्दाकभी तू न तोड़ सकता अगर इस्तेवार होटायह कहाँ की दोस्ती है (कि) बने हैं दोस्त नासेहकोई चारासाज़ होता कोई ग़म गुसार होताकहूं किससे मैं के क्या है शबे ग़म बुरी बला हैमुझे क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता(ग़ालिब)इशरते कत्ल गहे अहले तमन्ना मत पूछइदे-नज्जारा है शमशीर की उरियाँ होनाकी तेरे क़त्ल के बाद उसने ज़फा होनाकि उस ज़ुद पशेमाँ का पशेमां होनाfor more details go to:http://bhagatsinghstudy.blogspot.com/

दुनिया का बोझ- किरणदीप कौर

दुनिया का उठाकर बोझ,
खुद एक बोझ कहलाई है.
हारकर ख़ुशी अपनी,
जीत में दुःख ही लायी है.
होंठो पर लाकर हंसी,
आँखों की नमी छुपायी है.
पत्नी बनकर किसी का घर बसाया,
तकलीफें सहकर माँ कहलाई है.
अँधेरे में रहकर रौशनी बनी खुद
फिर भी क्यों,
ये दुनिया को नहीं दिख पाई है.
आसमान में ऊँचा है इसका वजूद,
समंदर से गहरी इसकी गहराई है.