"नियामक" शब्द रुडयार्ड किपलिंग की कविता "If" के हिन्दी अनुवाद मे मुझे मिला था। यह कविता मुझे काफी अच्छी और प्रेरणा स्त्रोत लगी। तब से यह शब्द मेरी जिन्दगी का अहम् और चुनिन्दा शब्द बन गया है। मूल कविता यहाँ पर दी गई है उम्मीद है आपको भी पसंद आएगी, इस सेक्शन मे आप चुनिंदा कवियों ,लेखकों ,विचारको के विचार इस मुख पृष्ट पर पाएंगे। -देशराज सिरसवाल

Monday, May 19, 2008

टूटे हुए पर की बात / ज्ञान प्रकाश विवेक

कभी दीवार कभी दर की बात करता था
वो अपने उज़ड़े हुए घर की बात करता था


मैं ज़िक्र जब कभी करता था आसमानों का
वो अपने टूटे हुए पर की बात करता था


न थी लकीर कोई उसके हाथ पर यारो
वो फिर भी अपने मुकद्दर की बात करता था


जो एक हिरनी को जंगल में कर गया घायल
हर इक शजर उसी नश्तर की बात करता था


बस एक अश्क था मेरी उदास आंखों में
जो मुझसे सात समंदर की बात करता था


Cited from:"http://hi.literature.wikia.com/wiki, Dated:19-05-2008

1 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

थी लकीर कोई उसके हाथ पर यारो
वो फिर भी अपने मुकद्दर की बात करता था

bahut khoob...

बस एक अश्क था मेरी उदास आंखों में
जो मुझसे सात समंदर की बात करता था

aor ye bhi khoob hai.....